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अजंता गुफाएं की जानकारी, अजंता गुफाएं काहापर है


           अजन्ता गुंफाएं भारत के महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है। औरंगाबाद से 100-110 किमी की दूरी पर, वाघुर नदी की तलहटी में अजंता गांव से 3 किमी की दूरी पर हरे-भरे जंगल अपने चारों तरफ हरियाली की चादर ओढ़े खड़ी बड़ी बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं और उनके साथ होकर गुजरती वाघुर नदी कीनारे.ऐसे ही नेचुरल ब्यूटी के बीच मौजूद है अजंता की गुफाएं इतिहास की यात्रा आज से करीब दूसरी ओर तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 15 वी शताब्दी के बीच राष्ट्रकूट राजवंश के अलग-अलग खंडों के दौरान इन गुंफा ओ का निर्माण 2 फेस में हुआ था फर्स्ट फेस में केस नंबर नाइन ९,१०,१२,१३और 15 बनाई गई तो वही बाकी गुफाओं का निर्माण सेकंड फेस में हुआ था जब नंबर नाइन अजंता केव की सबसे पुरानी है अजंता केव का पूरा स्ट्रक्चर देखें तो इसे दो भागों में अलग-अलग भागों में बांटा जा सकता है सबसे पहला चैत्य जहां पर पूजा की जाती है और दूसरा करते थे ट्वेंटी पर्सेंट एरिया है जहां पर बौद्ध भिक्षु रहा करते थे क्योंकि अजंता की गुफाएं बौद्ध धर्म से प्रेरित है इसीलिए यहां की ज्यादातर दीवारों पर की गई नक्काशी भी बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई हैं कहा जाता है कि गुफाओं की खोज धर्म से प्रेरित है इसीलिए यहां की ज्यादातर दीवारों पर की गई नक्काशी बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई हैं कहा जाता है कि गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मित 1819 में की थी वहां पर शिकार करने आए थे इसके बाद से ही की गुफाओं में पूरी दुनिया से टूरिस्ट का आना शुरू हो गया था अजंता केस को 1923 में वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल किया गया था गुफा के प्रवेश द्वार के ठीक सामने दीवार काटकर बनाई गई थी एक विशाल मूर्ति है इसके अलावा आप यहां की दीवारों पर बौद्ध धर्म से जुड़ी कई जानकारी मीलती है.अधिक साल बीत जाने के बावजूद आधुनिक समय के लिए आश्चर्य का विषय है .भगवान बुद्ध की पेंटिंग्स के साथ-साथ यहां अजंता की गुफाओं की दीवारों पर खूबसूरत अप्सरा हो और राजकुमारियों की अलग-अलग मुद्राओं में खेले गए चित्र में जो यहां की उत्कृष्ट चित्रकारी और मूर्तिकला के बहुत ही सुंदर उदाहरण है .यहै गुंफाऔ में बौद्ध कालीन इतिहास की झलक नजर आती है! 

अं‌जन्ता गुंफाऐ देखणे के लिये सटल बस की सुविधा उपलब्ध है!गुंफाऐ देखणे के लिये पर्यावरण और ध्वनिप्रदूषण हे गुंफाऔ को कोई हानी न पाहुणे ईसलीये सटल बस का ईस्तेमाल की या जाता है!यहापर निजी वाहन पर पांबदी है!



गुंफाएं की खोज

मद्रास इलाके के ब्रिटिश अधिकारी जाॅन स्मिथ बाघ की शिकार करने आते थे उसी दौरान १८१९ में इन गुफाओं की खोज लगी।

गुंफाएं का समय

यह गुफाएं बौद्ध कालीन है।ईसा पूर्व द्वितीय चरण ओर चौथे चरण में इन गुफाओं का निर्माण हुआ है।२ फेस में हुआ था फास्ट फेस में गुंफा नं ९,१०,११,१२ ,१३ ओर १५ बनाई गई।बाकी गुंफाएं का निर्माण सेकंड फेस में हुआ था। पुरातत्व विभाग के नुसार इन गुफाओं का निर्माण हिनयान काल दौरान हुआ है।

गुंफाएं की जानकारी

गुंफा नं।१ इन गुफाओं को मजबूत खम्बो पर स्थित है। द्वार पर अद्भुत कोरीव नक्शे बनाये है ।अंदर पुजा स्थल में बुद्ध की ध्यान-साधना में लीन मुखर्जी है।इस गुंफा के सभा मंडप में बीस खम्बो पर खड़ा है। इन खम्बो पर कोरीव कारगीरी देखने को मिलती हैं। इनमें बुद्ध की जिंदगी पर आधारित है।

  गुंफा नं। २ इस गुंफा में बुद्ध की जन्म की कथाएं दर्ज है। बुद्ध अपन  माता एवं पिता को कितना प्रेम करते थे यह दर्शाता है।

गुंफा नं३।    यह गुंफा का काम अधुरा है।

गुंफा नं ४।  इस गुंफा के व्दार पर व्दारपाल   की जोड़ी दिखाई देती है।यह गुफा सबसे बड़ी मानी जाती है।यह गुफा २८ खम्बो पर स्थित है।इस गुफा के अंदर पुजा स्थल में भगवान बुद्ध की ६विशाल मुर्तियां है।

गुफा नं ५ यह गुफा काम अधुरा है। कहा जाता है कि इन गुफाओं काम के लिए वाकटक राजा से आर्थिक सहायता मिलती थी। लेकिन साहायता आता बंद होने से इस गुफा का निर्माण काम अधुरा रहा।



गुफा नं ६ यह गुफा दो मंजिल है। सभामंडप में बुद्ध की पद्मनाभ मुद्राओं में देखने को मिलाती है।ओर दुसरे मंजिल के भवन में व्दार पर मगर एवं फुल के गोल आर्च बनाई है।
गुफा नं ७ इस गुंफा में बुद्ध की मूर्ति है। पिछले दिवार पर प्रभा मंडल दिखाई देता है।
गुफा नं ८ इस गुफा में पर्यटन विभागों द्वारा विद्युत कक्ष स्थापित किया है।
गुफा नं ९ इस गुफा में स्तुप हैं।
गुफा नं १० यह गुफा। एक हनियांन मंदिर है। जिसमें ४० खम्बो पर स्थित है।स्तुप पर पाली लिपी में लेख लिखा हुआ देखने को मिलता है।इस लेख से अंदाज लगा सकते हैं की ।यह गुफा ईसा सेकंड फेस में निर्माण हुआ है।
   गुफा नं ११ यह गुफा तिन मंजिला है। ऊपर के मंजिल पर भिक्षु रहा करते थे। निचे के मंजिल पर दुर्गा एवं गणपति की मूर्तिएं मौजूद है।इस गुफा का सभास्थल बोहोत बड़ा है। इसमें बुद्ध की मूर्ति है।

गुफा नं १२ यह एक शयन कक्ष है।इस में बुद्ध की बात मुर्तियां है।

गुफा नं १३,१४, एवं १५ इनका काम कुछ अधुरा है।

गुफाएँ K.16 इन गुफाओं में महत्वपूर्ण चित्र हैं।पूजा स्थल बुद्ध की एक विशाल मूर्ति है। यहाँ कथकली नृत्य के चित्र दिखाए गए हैं छत पर चित्र कला सुंदर और आकर्षक है। गुफा के.17 गुफा में बुद्ध की कई प्यारी यादें और कहानियां हैं। पूजा स्थल पर बुद्ध की एक मूर्ति है। एक तरफ बुद्ध के पूर्व जन्म की तस्वीर है। एक हाथी की तस्वीर है। में से एक चित्रों से पता चलता है कि कपड़े के टुकड़े का किनारा कपड़े की एक पट्टी है। गुफा सी18 इस गुफा के बारे में कुछ खास नहीं है गुफा K19। गुफाओं में चित्र हैं। कुछ चित्र विकृत हैं। गुफाओं में नक्काशीदार स्तंभ हैं। गुफाएँ घोड़े के आकार के मंदिर हैं। गुफाओं को विभिन्न बुद्ध मूर्तियों के साथ उकेरा गया है। 3 गुफाएं K.21 इन गुफाओं को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा गया है। नक्काशीदार स्तंभ हैं जहां बुद्ध अपने शिष्यों को मार्गदर्शन और ज्ञान देते हुए दिखाते हैं। गुफाएँ C.22.23.24 ये गुफाएँ अधूरी हैं। गुफा K.25 इस गुफा को अपर्णा विहार के नाम से जाना जाता है इस गुफा में कोई पूजा स्थल या कमरा नहीं है। गुफा K.26 बुद्ध के जीवन पर आधारित दो पेंटिंग हैं।पहली तस्वीर में महापरिनिर्वाण मुद्रा दिखाई गई है। गुफाएं c.27,28,29 अधूरी हैं। यहां पहुंचने के लिए कोई सीढ़ियां नहीं हैं।

एलोरा गुफाएं जानकारी

दौलताबाद किल्ले कि जानकारी

अजंता गुफाएं की तस्वीरें
















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🔹एलोरा गुंफा की जानकारी

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