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एलोरा गुफाएं , महाराष्ट्रातील गुफाएं, वेरूल की गुफ़ाएं,

 एलोरा गुफाएं


          भारत के महाराष्ट्र राज्य के तहत  औरंगाबाद जिल्हे में औरंगाबाद करिब लगबग ३० की.मी की.दुरी पर वेरूळ ,ऐलोरा गुंफाऐ है!यह गुंफाऐ कैलास मंदिर के नाम से भी पहचाने जाते है! यह गुंफाऐ प्राचीन कला का नायाब नमुना देखणे को मीलता है!यहाँ पर देश-परदेश से लाखो टुरिझम आते है .यहापर ३४ लेणी है.इस लेणी का निर्माण छटी  और बारावी  सदी के बीच राष्टकुट वंश द्वारा गुफाओका निर्माण कराया गया था साल १९८३ मे युनोस्कोने एलोरा गुफावको  वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया . इस बात से अंदाज लगा सकते है.कि महाराष्ट्रकी ऐतिहासिक  खुबसूरती को देखणे के लिये हर रोज सैकडो भारतीय ओर विदेशी पर्यटक हररोज यहा पाहूचते है.
       एलोरा गुफाये पुरे विश्व मे चट्टानोको काटकर बनाये सबसे मठ -मंदिर मे से एक है.अजंता केव्स एलोरा केव्स तक हि सीमित नही है. बल्की यहा पर हिंदू ओर जैन मंदिर भी है.वैसे तो एलोरा मे १०० केव्स है लेकीन उन्मे से केवल ३४ केव्स ऐसे है.जो पब्लिक के लिये open है .उन्मे से गुफा न.१६ 
.      यहापर १ से १२ तक की गुफाएं बौद्ध कालीन है ,१३ से २९ तक की गुफा  हिंदू धर्म की है, और ३० से ३४ तक की गुफा जैन धर्म की है.

गुफाओ की जानकारी 

बौद्ध गुफाएं

गुंफा क्र.१ यह एक विहार या आवास स्थान है।जहां भिक्षु रहते थे। एक चौकार सभामंडप एक तरफ की दीवार में ४ कोठरी है।इस गुंफा में किसी प्रकार का अंलकार खंम्बे और शिल्प मुर्ती नहीं है।
गुंफा नं २ यह एक उपासना स्थल है। बाहरी बरामदे में एक कोने में एक पंछी का जो धन का देवता हैं। और हरित जो समृद्धि व सौभाग्य की देवी है उनकी मूर्तियां है.प्रवेश व्दारे में व्दारपालक या रक्षक हैं साथ में खिडकीयां.है।बडा हॉल 12 स्तंभो से आश्रित है इनमें से कुछ गुलदस्ता और पत्तों के गुछो से अलंकृत करते हैं जिसके बगल में दोनों और दहलीज अथवा चित्र शाला है।.पिछली दिवार के मध्य में एक बैठे हुए बुद्ध की मूर्ति है 3 मीटर ऊंची साथी दुखड़े बुद्ध भी हैं
दोनो तरफ की दीवारों में बोधिसत्व अप्सराओं और परियों सहित बुद्ध की पांच मूर्तियां है.
गुंफा नंबर ३ भी ऐसे ही है।.उसे बिच का एक चौकोर कमरा है कमरे के आखिरी छोर में बुद्ध एक कमल पर विराजित है दीवारों के चारों तरफ १२ धान्य कोठरीया  हैं.
गुफा नं ४.दो मंजिला है।यहां बुद्ध पिंपल के वृक्ष के 
 नीचे बैठे हैं.एक और हैं मंदिर में दुसरी मुर्ती अधुरी हैं.यह हाॅल गुलदस्त्य और पत्तो के गुलदस्त्य से अलंकृत हैं.
गुफा नं ५ कुछ अलग है।.उचाईपर खोदा गया यह गुफाओं में सबसे बड़ा एक ही मंजिल का है विशाल हॉल है जो तीन हिस्सों में बटा हुआ है.तीनो तरफ की दिवारो के बिच देवरीया हैं.और उन में.छोटी कुटीया हैं.चारो और बडे खम्बो पर गहन पत्तों के गुंछे और पदक शिलपीत हैं जमीन पर खनन की गई चौकिया है लगता है यह कक्ष भोजन कक्ष था प्रमुख मंदिर के प्रवेश द्वार में बोधिसत्व की अलंकृत मूर्ति है जो साफे और आभूषणों से सुसज्जित है जमीन पर पद्मासन में बैठे बुद्ध  की जगह जहां पर बुद्ध एक आसन पर बैठे हैं .यां हैं इसके बाहरी भाग में एक असाधारण दृश्य है.देवी तारा का जो अपने भक्तों को एक सांप से बचा रहे हैं एक तलवार एक हाथी और एक टूटा हुआ जहाज है।
गुफा नं ६.मे कहीं अति विशाल मूर्तिएलोरा की गुंफाऐ 
                     एलोरा की गुफाए जिनका एक धार्मिक महत्व तो है.साथ हि साथ यहापर घुमतेही हि पायेंगे यहापर की गई नायब चित्रकारी ओर मुर्तीयोको अपने आप मे एक युनिक है.
गुफा नंबर ७.यह साधी गुफा है।
गुफा नं ८ .यह गुफा की अलग निशानी है क्योंकि एलोरा रूप में ही एक ऐसा मंदिर है जहां गर्भगृह पिछली दीवार से दूर है और एक घुमावदार पगडंडी चारों तरफ है.
गुंफाएं नं  ९ में खुला छज्जा है।और एक बरामदा और एक मंदिर है।.
गुंफाएं नं १० एक  चैत्य प्रार्थना कक्ष है। जिसको विश्वकर्मा नाम दिया गया है.जो की देवतायो के वास्तुशिल्प है प्रार्थना कक्ष भीक्षु ओ  के आवास के नीचे हैं इन के दोनों तरफ बरामदे हैं जो नीचे के भाग से उठाए गए हैं और अनेक युगो से शिल्पीत है. एक विशाल स्तुप  है बुद्ध की बैठी हुई मूर्ति.और साथ उडते सेवक बरामदे के साथ  कुछ सिड़िया है जो ऊपर की दहलीज तक जाती है जहां पर चैत्य प्रकार की खिड़कियां उडते देव और बोधिसत्व अपनी सेविका सहित है इसका बाहरी हिस्सा इतना चमकदार है जैसे लकड़ी का बना हो.
गुंफा नं ११.और गुफा नंबर 12 पहली तीन मंजिलों की है और उसमें एक निचला स्तर भी है ऊपर भीक्क्षुऔ 
 का निवास स्थान और यात्रियों के लिए भी रहने की जगह है नीचे मंदिर है दुर्गा और गणेश की मूर्तियां है लगता है बाद में हिंदुओं ने इसका उपयोग किया होगा उनका 
गुंफा नंबर 12 अंतिम गुंफा.
इस में एक शयन कक्ष हैं.रोचक शिल्प है 7 बुद्ध की मूर्तियां श्रेणी बध्द  है उस विश्वास की ओर संकेत करता है कि बुद्ध 5000 वर्ष में एक बार अवतार लेते हैं और अब तक सात बार अवतरित हुए हैं.

हिंदू गुफाएं

गुफा नं १३ से लेकर 29 तक हिंदू गुफाएं हैं इनका निर्माण ईसा पश्चात् 600 से 875 तक किया गया.देवी-देवताओं अप्सराओं परियों पशु पौधों और वृक्षों से भरपूर है इनकी कारीगरी इतनी महीन और सूक्ष्म है कि उनको बनाने और इनकी योजना बनाने में कई शताब्दियों लगी हो इसमें कोई संदेह नहीं.  
गुंफा नंबर 15 दशावतार मंदीर जिसमें विष्णु के 10 अवतार को दर्शाया गया है
 गुफा नंबर 16 हिंदू मंदिरों में अति श्रेष्ठ कैलाश मंदिर है यह भगवान शिव को समर्पित है.परंतु अन्य देवता भी पूजित है यह विश्व का सबसे विशाल अखंड चट्टान के अवशेषों से काटकर बनाया गया मंदिर है एक ही चट्टान से खोदकर बनाया गया यह यूनान के पार्थ नॉन से दुगना है .स्तंभ से आश्ररीत दहलिज हैं. जो तीन मंजिल उंची है विशाल शिल्प चौकडे हैं जिनमें बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं और आंगन के अंदर तो बड़ी रचनाएं है नंदी की मूर्ति जो कि शिव भगवान का बैल है और शिव का प्रमुख मंदिर के सम्मुख वह है दोनों ही सात मीटर उंचे हैं एक पत्थर का पुल है जो नंदी के चबूतरे को मंदिर की देवडीसे  मिलाता है मंदिर में स्तंभ और बाहरी कमरे धार्मिक परिषदों के कक्ष और अंतर भाग में अधिक उन्नत शिवलिंग.और
अति अलंकृत देवतावो और संयुक्त दंपतियों की है.यदी यह शिव मंदिर है फिर भी इस में वैष्णो देवता भी हैं.इस 
मंदिर में अनोखा आश्चर्यजनक शिल्प हैं रावण कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश करता कैलाश जो भगवान शिव का आवास स्थान है इसी कारण इसका नाम कैलाश मंदिर.पडा 200 हजार टन फत्तर काटकर बनाया गया कैलाश मंदिर जिल्हे पूरा करने में 1हजार वर्ष लगे अन्य प्रमुख हिंदू गुफाएं हैं 
गुंफा नंबर 21
रामेश्वर मंदिर के प्रवेश द्वार में नदी देवियों की मूर्तियां है 
गुंफा नंबर 29 
धुमर लेना गुफा की रचना मुंबई के एलीफेंटा गुफाओं की तरह है.

जैन मंदिर.

पाॅच जैन मंदिर 800 से 1000 ईसवी तक निर्मित हुए थे यह मंदिर अति विशाल और अच्छे अनुपात के हैं और एलोरा के अंतिम औद्योगिक काल के सूचक है। महाराष्ट्र की जैन इमारत में एलोरा की जैन गुंफा श्रेणी श्रेष्ठ उदाहरण है.इन गुफाऔ में गहन अलंकृत नकाशे के बनाये गये स्तंभ इन गुफाऔ के वास्तुशिल्प की निपुणता और कार्य कुशलता के उदाहरण हैं
गुंफा नंबर 30 यह एक छोटा कैलास भी कहलाता हैं आहे कैलास मंदिर के प्रतिरूप छोटी आकृती बनाने की योजना थी परंतु वह पुरी न हो सकी इसमे 22तिर्थनकरो के मंदिर हैं  और महावीर गर्भगृह में हैं.
गुंफा नंबर 32 इंद्र सभा के नाम से प्रसिद्ध हैं यह जैन मंदिर में श्रेष्ठ यांना जाता है और महाविर को समर्पित है.
एक सामान्य प्रवेशद्वार खुले आंगण में ले जातात है.इसके बिच मंदिर है.हातीऔ और  तीर्थंकरों से भरे हुए हैं निघे की दिवाकर अपुर्ण हैं पर उपरी स्तंभ मे अंबिका और महाविर की मुर्तीया हैं.ऐ तिर्थनकरोसे चित्रे घिरे हैं
उपरी छत बहुतही सुंदर गढी गयी हैं  बीच में एक विशाल कमल है और चित्र मूर्तियां बादलों के बीच नगर आते हैं यह मंदिर जैन धर्म और उपदेशों के प्रतिरूप है.और कुछ मत के कठोर नियमों और वैराग्य की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है यह गुफा अन्य गुफाओं की तरह बहुत बड़ी तो नहीं पर अति कलात्मक और बारीकी से की कृतियां है कई में भीती छत सुंदर चित्रकला का प्रदर्शन है और अलंकृत स्तंभ है जो अभी हम देख पाते हैं अंतता तिन‌ महान धर्मों के संगम के एक ही स्थान पर मौजूद जी के अलावा एलोरा सुंदरता का और शक्ति का जो स्मारक हैं जो हजारो शताब्दियों पूर्व बना

एलोरा गुंफाओ की चित्रे























अजिंठा गुंफाये की जानकारी
दौलताबाद फोर्ट की जानकारी
गुफाओ की विशेषताए 
            एलोरा की गुफओमे स्थित मोजूद सबसे प्रसिध्द गुफा विश्वकर्मा है.गुफा मे से हर एक की अपनी विशेषताए है.इन गुफाओ की  दिवार पर की गई कलाकृतीयो की चट्टानोको काटकर कि गई है.नक्क्शियो की या फिर गुफाओ  मे बनाई गई विशाल मुर्तीया इस जगाह कि खासियत है..जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटक गुफओमे आते ही इनमे शिल्पी शाश्वत स्मारक बना गये पुरातत्व विभागाने प्रमाणित किया की २०००० हजार इ.सा.पुर्व यह स्थान लोगो से आबाद था इ.सा के आदी काल में शाकवाहन वंश राजा ओ का राज था उस समय एलोरा एक प्रमुख केंद्र बना व्यापारी व गणिको  के अलावा राजकीय संरक्षण मिलता था !पीछे कि दिवार पर राष्ट्र कुट के आरक्षण के बारे मे वर्णन किया गया है! 

 एलोरा गुफाएं देखने के लिए रूट

रेल से
     मुंबई से रेल से 200 की भी दुरी पर औरंगाबाद शहर हैं। वहां से करीब 2-3 घन्टें का सफर है भी बस या टैक्सी उपलब्ध हैं 
हवाई जहाज से
     औरंगाबाद से 30 की भी की दुरी पर हवाईअड्डे है वहां से टैक्सी या बसे एलोरा जा सकते
 एलोरा जाते समय आपको दौलताबाद का किल्ला देखने को मिलेगा 

 


       

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